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कोणार्क मंदिर का अध्भुत निर्माण शैली व इसका रहस्य

              कोणार्क मंदिर का अध्भुत निर्माण व इसका रहस्य

               हम जिस भारत में रहते हैं वह भारत अनेक विस्मय से भरा है | अनेक धर्म , जातियां ,वेशभूषा , संस्कृतियां और भाषाएँ | जी हाँ यही भारत है | मंदिरों में भजन तथा शंख के सुखद नाद मस्जिद में अज़ान और चर्च में प्रार्थना जी हाँ  यही भारत है | कोणार्क हिंदू मंदिर उड़ीसा के कोणार्क में स्थित है इस मंदिर का आकार रथ की तरह है | वास्तव में यह मंदिर सूर्य देव को समर्पित है |     

कोणार्क मंदिर कीअध्भुत निर्माण  - कोणार्क मंदिर का निर्माण १३ वीं सदी में हुआ था | इस मंदिर का निर्माण पूर्वी गंगा राजवंश के राजाधिराज नरसिम्ह देव द्वारा  1238 -1250 किया गया | 

कोणार्क मंदिर को १९८४ में यूनेस्को ने विश्व धरोहर घोषित कर मान्यता दी थी | 

कोणार्क मंदिर को लेकर धार्मिक मान्यता -एक मान्यता के अनुसार श्री कृष्ण के पुत्र साम्ब इनके श्राप के कारण कोढ़ रोग से पीड़ित हो गए थे | सूर्य देव द्वारा इनके रोग का नाश हुआ तब  साम्ब ने सूर्य देव के सम्मान में इस मंदिर का निर्माण करवाया | 

कोणार्क मंदिर की निर्माण शैली व इसका आकार - अध्भुत मानव संरचना का उत्तम उदहारण  कोणार्क का भव्य मंदिर है | कोणार्कं मंदिर को कलिंग शैली में बनाया गया है | आकार में यह मंदिर एक विशाल रथ की भांति है | पूरा मंदिर उत्कृष्ट नक्काशिंयों से  भरा पड़ा है |कहा जाता है की मंदिर के शीर्ष पर लोहे के साथ एक विशाल चुंब्बक सुसज्जित था चुम्बक के प्रभाव से गर्व गृह की मूर्ति हवा में तैरती थी | मंदिर के आगे सात घोड़े रथ को खींचते हुए दिखते  प्रतीत होते हैं | बारह जोड़ी पहिये जो बेहद विशेष हैं | सुंदरता के साथ साथ यह पहिये सटीक समय भी दर्शाते हैं | 


मंदिर तक पहुँचने का रास्ता -हज़ारों की संख्या में पर्यटक कोणार्क मंदिर में दर्शन हेतु आते हैं | आप भी यहाँ की भव्यता के दर्शन से अनुग्रहित हो सकते हैं | यहाँ का निकटतम हवाई अड्डा भुवनेश्वर में है यहाँ से कोणार्क मंदिर मात्र ६५ किलोमीटर है | अगली बार जब भी समय हो इस मंदिर के दर्शनार्थ अवश्य जाएँ  और सूर्य देव को समर्पित इस मनीर के सूर्योदय तथा सूर्यास्त का भव्य आनंद लें | धन्यबाद जय सूर्यदेव || 



 

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